Author: Dilpreet Kaur Taggar

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कमरा

आज थोड़ा अजीब है कल से कम, पहले से ज़्यादा हवा सख्त है, पानी खारा कभी रानी, कभी राजे का प्यादा सच कहूं तो मालूम नहीं है क्यों नाराजगी है सच कहूं तो मासूम नहीं […]