कमरा

आज थोड़ा अजीब है कल से कम, पहले से ज़्यादा हवा सख्त है, पानी खारा कभी रानी, कभी राजे का प्यादा सच कहूं तो मालूम नहीं है क्यों नाराजगी है सच कहूं तो मासूम नहीं है ये जो चेहरे पे सादगी है ना किसी ने पुछा है हमसे ना हमने किसी को बताया है ख़ुशी,…

Red

How funny is it that the same Red which speaks of love and heart speaks of blood and revenge too. A piece of work written in a small garden with lovely friends at a time when an idea meant the world for us – Samar Syal and Pragati Khabiya